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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन
(डीआरडीओ)
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दृष्टि
-
ध्येय
-
आधारभूत
योग्यता
मानव
संसाधन विकास
-
नियुक्ति
-
प्रशिक्षण एवं विकास
-
लचीली पारितोषिक योजना
डीआरडीओ पुरस्कार
डीआरडीओ में खरीद प्रक्रियाएं
अनुसंधान
बोर्ड
-
जैव विज्ञान अनुसंधान बोर्ड (एलएसआरबी)
-
नौसैनिक अनुसंधान बोर्ड
-
वैमानिकी अनुसंधान एवं विकास बोर्ड (एआरडीबी)
-
आयुध अनुसंधान बोर्ड (एआरएमआरईबी)
बाह्य अनुसंधान /बौद्धिक सम्पदा
अधिकार
उद्योगों के साथ साझेदारी
प्रदर्शनियां एवं एक्सपोजिशन |
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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के बारे में |
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दृष्टि
"विश्व-स्तरीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकीय आधार स्थापित कर
भारत को समृद्ध बनाना और अपनी रक्षा सेना को
अंतर्राष्ट्रीय रूप से प्रतिस्पर्धी प्रणालियों और
समाधानों से लैसकर उन्हें निर्णायक लाभ प्रदान करना।"
ध्येय
-
अपनी रक्षा सेवाओं के लिए अत्याधुनिक सेंसर,
शस्त्र प्रणालियां,
मंच और सहयोगी उपकरण अभिकल्पित करना,
विकसित करना और उत्पादन के लिए तैयार करना।
-
संग्रामी प्रभावकारिता अधिकतम करने और सैनिकों की बेहतरी
को बढ़ावा देने के लिए रक्षा सेवाओं को तकनीकी समाधान
प्रदान करना।
-
अवरचना तथा गुणवत्तापूर्ण प्रतिबद्ध श्रमशक्ति विकसित
करना और मजबूत प्रौद्योगिकी आधार निर्मित करना।
आधारभूत योग्यता
अनेक उन्नत रक्षा प्रणालियां विकसित कर चुके डीआरडीओ ने
रक्षा प्रौद्योगिकियों के एक व्यापक वर्णक्रम में
विशेषज्ञता अर्जित कर ली है। संगठन की आधारभूत योग्यता
वाले क्षेत्रों में शामिल हैं:
संश्लिष्ट सेंसरों, शस्त्र प्रणालियों तथा मंचों का
प्रणाली अभिकल्प एवं एकीकरण;
संश्लिष्ट उच्च-स्तरीय सॉफ्टवेयर पैकेजों का विकास;
कार्यात्मक सामग्रियों का विकास;
परीक्षण एवं मूल्यांकन;
प्रौद्योगिकी हस्तांतरण एवं समावेशन। इसके अतिरिक्त, रक्षा
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, गुणवत्ता आश्वासन एवं सुरक्षा,
परियोजना एवं प्रौद्योगिकी प्रबंधन के लिए प्रासंगिक
क्षेत्रों में मौलिक/प्रयुक्त
अनुसंधान के लिए विशेषज्ञता तथा अवरचना भी निर्मित की गई
है। |
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मानव संसाधन विकास |
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भर्ती |
|
रक्षा अनुसंधान एवं विकास सेवाएं (डीआरडीएस) |
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वांछित योग्यताओं वाले उपयुक्त लोगों का चयन तथा भर्ती
किसी भी प्रभावी संगठन के निर्माण का आधार होते हैं। रक्षा
अनुसंधान एवं विकास संगठन राष्ट्रीय स्तर पर खुले विज्ञापन
के जरिए वैज्ञानिक प्रवेश परीक्षा (एसईटी) नामक वार्षिक
प्रतिस्पर्धी परीक्षा के माध्यम से वैज्ञानिकों तथा
इंजीनियरों का चयन/भर्ती
करता है। इसके अतिरिक्त, परिसर साक्षात्कारों, वैमानिक
अनुसंधान एवं विकास बोर्ड (एआरडीबी) के माध्यम से
शोधवृत्ति योजना और अध्येता अभिवृत्ति युक्त विद्यार्थियों
का पंजीकरण (रोस्सा) योजना के अंतर्गत नए पीएच.डी.
अध्येताओं के माध्यम से प्रतिभाओं की खोज भी आरंभ की गई
है। |
|
रक्षा अनुसंधान तकनीकी काडर (डीआरटीसी) |
|
इस काडर के सदस्य अनुसंधान एवं विकास कार्य में लगे
वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की सहायता हेतु एक सुदृढ़ कुशल
जनशक्ति आधार का निर्माण करते हैं। |
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प्रशासनिक एवं संबद्ध काडर |
|
प्रशासनिक एवं संबद्ध काडर के सदस्य प्रशासकीय/स्थापना
समर्थन प्रदान करते हैं। अधिकारी पदों के लिए कर्मियों की
भर्ती यूपीएससी के माध्यम से होती है तथा अराजपत्रित
कर्मियों की भर्ती अधिसूचित भर्ती नियमावली के अनुसार
प्रयोगशालाओं/स्थापनाओं द्वारा की जाती है। |
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प्रशिक्षण एवं विकास |
|
डीआरडीओ की एक गतिशील प्रशिक्षण एवं विकास नीति है जिसे
सभी काडरों के कर्मियों यानी डीआरडीएस, डीआरटीसी,
प्रशासनिक एवं संबद्ध के लिए सतत शैक्षणिक कार्यक्रमों
(सीईपी) के माध्यम से क्रियान्वित किया जाता है। डीआरडीएस
में प्रवेश स्तर पर, नवनियुक्त वैज्ञानिक आयुध
प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएटी), पुणे में 16 सप्ताह का
अधिष्ठापन पाठ्यक्रम पूरा करते हैं। अनुसंधान एवं
प्रशिक्षण (आर एंड टी) योजना के अंतर्गत वैज्ञानिकों को
आईआईटी/आईआईएससी तथा प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में
एमई/एमटेक कार्यक्रमों के लिए प्रायोजित किया जाता है।
डीआरडीओ पीएच.डी कर रहे वैज्ञानिकों के शुल्क की
प्रतिपूर्ति भी करता है। इसके साथ ही, अपने दो प्रमुख
संस्थानों प्रौद्योगिकी प्रबंधन संस्थान (आईटीएम) और आयुध
प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएटी) मानित विश्वविद्यालय के
माध्यम से संगठन प्रौद्योगिकी प्रबंधन, अनुसंधान एवं विकास
प्रबंधन तथा आयुध के क्षेत्र में वैज्ञानिकों तथा सशस्त्र
बलों के लिए पाठ्यक्रम भी प्रस्तुत करता है। हाल ही में,
प्रशासनिक एवं संबद्ध काडर की प्रशिक्षण संबंधी आवश्यकताओं
को पूरा करने के लिए जोधपुर में एक प्रशिक्षण केंद्र
स्थापित किया गया है।
भविष्योन्मुखी प्रतिभाओं को आकर्षित करने के उद्देश्य से,
डीआरडीओ रक्षा अनुसंधान एवं विकास में रुचि रखने वाले युवा
एवं गतिशील कर्मियों के लिए कनिष्ठ शोधार्थी (जेआरएफ),
वरिष्ठ शोधार्थी (एसआरएफ) और शोध सहयोगी (आरए) योजनाएं
चलाता है। |
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लचीली पारितोषिक योजना |
|
डीआरडीओ में, समय-समय पर संशोधित डीआरडीएस नियमावली 1979
के अंतर्गत एक वेतनमान से अगले उच्चतर वेतनमान में
वैज्ञानिक 'जी' के वेतनमान तक पदोन्नति के लिए लचीली
पारितोषिक योजना (एफसीएस) लागू है, जो 01 जुलाई 1990 से
प्रभावी है। एफसीएस के अंतर्गत योग्यता-आधारित पदोन्नति के
अंतर्गत वैज्ञानिक का पद स्वत: अगले उच्चतर वेतनमान में
अपग्रेड हो जाएगा। डीआरडीओ एक पूर्णत: लचीली पारितोषिक
योजना (एफसीएस) चलाता है जिसके अंतर्गत पद स्वत: वैज्ञानिक
'जी' के वेतनमान तक अपग्रेड हो जाते हैं। एफसीएस गोपनीय
कार्य-निष्पादन आकलन रिपोर्ट (सी-पीएआर) के मूल्यांकन और
वैज्ञानिक 'बी' से वैज्ञानिक 'ई' के वेतनमानों में आकलन
बोर्डों द्वारा वैज्ञानिकों के साक्षात्कारों तथा
वैज्ञानिक 'एफ' से वैज्ञानिक 'जी' में विशेषज्ञ समीक्षा
द्वारा आकलन के आधार पर संचालित होती है। |
|
डीआरडीओ पुरस्कार |
|
डीआरडीओ के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और उद्योगों तथा
अकादमिक संस्थानों में हमारे साझीदारों को हमारी राष्ट्रीय
सुरक्षा तथा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य में योगदान हेतु
प्रेरित करने के लिए डीआरडीओ पुरस्कार योजना, अपने वर्तमान
स्वरूप में, वर्ष 1999 में आरंभ की गई थी। इसलिए, भारत
सरकार द्वारा संस्थापित वर्तमान पुरस्कार योजना का
उद्देश्य डीआरडीओ के वैज्ञानिकों और सार्वजनिक क्षेत्र के
उपक्रमों (पीएसयू) में हमारे साझीदारों, निजी फर्मों के
साथ ही साथ अकादमिक संस्थानों को महत्वपूर्ण
प्रौद्योगिकियों के विकास, प्रयोगशालाओं से उद्योगों तक
प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण तथा अत्याधुनिक रक्षा
प्रणालियों के उत्पादनीकरण की गति तेज करने के लिए
प्रोत्साहित करना है।
इस योजना में कुल 17 पुरस्कार हैं, जिनमें से 4 पुरस्कार
संबंधित प्रयोगशालाओं/स्थापनाओं के निदेशकों द्वारा उनके
वैज्ञानिकों तथा तकनीकी, प्रशासनिक एवं संबद्ध काडर सहित
अन्य सहायक स्टाफ के उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देने हेतु
प्रदान किये जाते हैं। शेष 13 पुरस्कारों का निर्णय
डीआरडीओ मुख्यालय में किया जाता है जिसके लिए प्रत्येक
वर्ष सभी प्रयोगशालाओं/स्थापनाओं से नामांकन मंगाए जाते
हैं। नामांकनों की आरंभिक जांच भर्ती एवं आकलन केंद्र
(आरएसी) के अध्यक्षता में जांच समिति द्वारा की जाती है।
इसके बाद, पुरस्कारों को अंतिम रूप देने के लिए छांटे गये
नामांकनों की जांच सर्वोच्च समिति द्वारा की जाती है
जिसमें दो बाह्य विशेषज्ञ भी होते हैं। ये पुरस्कार
सामान्यत: भारत के प्रधानमंत्री द्वारा "प्रौद्योगिकी
दिवस" पर प्रदान किये जाते हैं जो प्रति वर्ष 11 मई के दिन
होता है।
पुरस्कार विजेताओं को नकद धनराशि के साथ ही एक प्रमाणपत्र
दिया जाता है जिसमें उस उपलब्धि को रेखांकित किया जाता है
जिसके लिए पुरस्कार दिया जा रहा है। इन पुरस्कारों के लिए
कुल वार्षिक स्वीकृत व्यय एक करोड़ रुपए है। एक दृष्टि में
पुरस्कार योजना परिशिष्ट-1 में संलग्न है। |
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परिशिष्ट-1 |
|
डीआरडीओ पुरस्कार एक दृष्टि मे |
|
पुरस्कार की श्रेणी |
नामित की संबद्धता |
राशि (लाख रुपयों में) |
प्रति वर्ष पुरस्कारों की अधिकतम संख्या |
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1.
सिलीकॉन ट्राफी |
डीआरडीओ प्रयोगशाला |
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2.
टाइटेनियम ट्राफी |
डीआरडीओ प्रयोगशाला |
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3.
पथ-प्रवर्तक अनुसंधान/असाधारण प्रौद्योगिकी हेतु डीआरडीओ
पुरस्कार
विकास पुरस्कार |
डीआरडीओ दल/अनुसंधान एवं विकास संगठन/अकादमिक संस्थान |
10.00 |
1 |
|
4.
डीआरडीओ जीवनपर्यंत उपलब्धि पुरस्कार |
डीआरडीओ व्यक्ति |
02.00 |
1 |
|
5.
प्रौद्योगिकी नेतृत्व पुरस्कार |
डीआरडीओ वैज्ञानिक |
02.00 |
2 |
|
6.
आत्म-निर्भरता में उत्कृष्टता हेतु अग्नि पुरस्कार |
डीआरडीओ/उद्योग/सशस्त्र बल/अकादमिक संस्थान |
02.00 |
5 |
|
7.
उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु डीआरडीओ पुरस्कार |
डीआरडीओ दल/प्रयोगशाला |
10.00 |
2 |
|
8.
रक्षा प्रौद्योगिकी समावेशन पुरस्कार |
उद्योग |
10.00 |
2 |
|
9.
अकादमिक श्रेष्ठता पुरस्कार |
अकादमिक संस्थानों के दल |
10.00 |
1 |
|
10.
वर्ष के श्रेष्ठ वैज्ञानिक का पुरस्कार |
डीआरडीओ वैज्ञानिक |
01.00 |
10 |
|
11.
युवा वैज्ञानिक पुरस्कार |
डीआरडीओ वैज्ञानिक |
00.50 |
8 |
|
12.
सर्वोत्कृष्ट प्रदर्शन पुरस्कार |
डीआरडीओ सहायता स्टाफ |
00.25 |
8 |
|
13.
रक्षा प्रौद्योगिकी व्युत्पन्न पुरस्कार |
डीआरडीओ प्रयोगशालाएं/उद्योग/अन्य संगठन |
02.00 |
5 |
|
14.
वर्ष के श्रेष्ठ प्रयोगशाला वैज्ञानिक का पुरस्कार |
प्रयोगशाला के वैज्ञानिक |
00.10 |
सदस्यों की संख्या के आधार पर 1 या 2 प्रति प्रयोगशाला |
|
15.
प्रौद्योगिकी समूह पुरस्कार |
वैज्ञानिकों/इंजीनियरों का समूह/दल |
00.20 |
1 प्रति प्रयोगशाला |
|
16.
डीआरटीसी काडर के लिए प्रयोगशाला पुरस्कार |
डीआरटीसी काडर |
00.05 |
सदस्यों की संख्या के आधार पर 1 या 2 प्रति प्रयोगशाला |
|
17.
प्रशासन एवं संबद्ध श्रेणियों के लिए प्रयोगशाला पुरस्कार |
प्रशासनिक/संबद्ध श्रेणियों से सहायता स्टाफ |
00.05 |
सदस्यों की संख्या के आधार पर 1 या 2 प्रति प्रयोगशाला |
|
डीआरडीओ में खरीद
प्रक्रियाएं |
|
सामग्रियों की खरीद डीआरडीओ प्रयोगशालाओं/स्थापनाओं में एक
सतत जारी गतिविधि है। सभी प्रयोगशालाओं/स्थापनाओं में एक
समान प्रक्रियाएं सुगम बनाने हेतु डीआरडीओ मुख्यालय ने
'खरीद प्रबंधन--2003 (पीएम-2003)' के रूप में
मार्गनिर्देशन जारी किया है जिसे सरकार द्वारा अनुमोदित कर
दिया गया है। मद की लागत तथा प्रकृति के आधार पर खरीद के
अधिकार का कुछ निश्चित स्तरों पर प्रतिनिधायन किया गया है।
आपूर्ति के सही स्रोत की पहचान के लिए, इस उद्देश्य के लिए
गठित एक समिति द्वारा सुपरिभाषित मानदंडों के जरिए सेवाओं
और अवरचना के मूल्यांकन के बाद विक्रेताओं का चयन और
पंजीकरण किया जाता है। मद की आवश्यकता को श्रेणीबद्ध किया
जाता है तथा खुले/वैश्विक/सीमित/एकल/स्वामित्व मद
प्रमाणपत्र(पीएसी) आधार पर निविदाएं आमंत्रित की जाती हैं।
सामान्यतया समस्त खरीद खुली निविदा के आधार पर की जाती है।
लेकिन, उच्च प्रौद्योगिकी परियोजनाओं के लिए एकाधिकारी
प्रकृति की सामग्रियों/कलपुर्जों की खरीद पीएसी आधार पर
प्रतिष्ठित विनिर्माताओं से की जाती है। विज्ञापन डीएवीपी
के माध्यम से स्थानीय और राष्ट्रीय समाचारपत्रों में
प्रकाशित किये जाते हैं। सामग्री प्रबंधन समूह के
प्रतिनिधियों, सतर्कता अधिकारी/सुरक्षा अधिकारी/उस दिन के
ड्यूटी अधिकारी से बनी निविदा खोलने वाली समिति निर्दिष्ट
दिशा-निर्देशों के अनुसार निविदाएं खोलती है।
खरीद की पद्धति के चयन का मानदंड "आवश्यकता की
अपरिहार्यता", "स्थानीय या अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मद की
उपलब्धता", "मद की लागत", "प्रतिस्पर्द्धात्मकता" आदि पर
आधारित होता है। तकनीकी प्रस्ताव तथा वाणिज्यिक प्रस्ताव
पृथक रूप से प्राप्त किये जाते हैं। इससे यह सुनिश्चित
होता है कि मदों का तकनीकी मूल्यांकन एक पृथक तकनीकी
मूल्यांकन समिति द्वारा किया जाए। सभी मामलों में, मुख्य
सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का
कड़ाई से पालन किया जाता है। उपयोगकर्ता, वित्त तथा
डीआरडीओ मुख्यालय के प्रतिनिधि निर्णय प्रक्रिया में भाग
लेते हैं। नियमित प्रयोग में आने वाली सामग्रियों/कल
पुर्जों के लिए चालू अनुबंध दर प्रक्रिया अपनाई जाती है।
विभिन्न एजेंसियों की सेवाएं भी इसी पद्धति से प्राप्त की
जाती हैं। संपूर्ण प्रक्रिया विक्रेताओं के लिए निष्पक्षता
एवं पारदर्शिता तथा उपयोगकर्ता के लिए आवश्यक मद की
उपलब्धता सुनिश्चित करती है। सामग्रियों की खरीद करते समय
किसी भी विक्रेता/आपूर्तिकर्ता/विनिर्माता के प्रति किसी
प्रकार के पूर्वाग्रह के बिना संगठन के हितों का संरक्षण
किया जाता है और व्यय किये जाने वाले प्रत्येक रुपये के
लिए अधिकतम मूल्य प्राप्त किया जाता है। |
|
अनुसंधान बोर्ड |
|
जैव विज्ञान अनुसंधान बोर्ड (एलएसआरबी) |
|
जैव विज्ञान अनुसंधान बोर्ड जैववैज्ञानिक एवं जैवऔषधि
विज्ञानों, मनोविज्ञान एवं शरीरविज्ञान, जैव-अभियांत्रिकी,
विशेषीकृत उच्च उन्नतांश कृषि, खाद्य विज्ञान एवं
प्रौद्योगिकी जैसे व्यापक विषयों पर जैव विज्ञानों में
अनुसंधान के प्रस्तावों को समर्थन देता है। बोर्ड ने देश
में जैव विज्ञानों एवं संबद्ध क्षेत्रों में अनुसंधान एवं
विकास कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करने के लिए आईआईटी,
विश्वविद्यालयों, चिकित्सा एवं जैव विज्ञान संस्थानों,
कॉलेजों और उद्योगों सहित अन्य शोध केंद्रों मे शोध
प्रतिभाओं को पोषित करने के लिए एक सहायता अनुदान योजना
संस्थापित की है। इस योजना के अंतर्गत अनुमोदित शोध
संस्थानों, विश्वविद्यालयों या कॉलेजों, विभागों या सरकारी
तथा गैर-सरकारी दोनों क्षेत्रों की प्रयोगशालाओं को अनुदान
दिये जाते हैं। इस योजना का समन्वय एलएसआरबी के अध्यक्ष
द्वारा विभिन्न अनुशासनों को समाहित करते हुए गठित किए गए
अनेक विशेषज्ञ पैनलों के माध्यम से किया जाता है।
एलएसआरबी के उद्देश्य इस प्रकार हैं :-
-
तकनीकी जानकारी और विशेषज्ञता सहित राष्ट्रीय संसाधनों
के सुदृढ़ीकरण एवं उपयोग के जरिये देश में जैव विज्ञानों
के ज्ञान-आधार को विस्तारित तथा गहरा बनाना।
-
सक्रिय सैनिकों को समर्थन प्रदान करने के लिए शोध
वैज्ञानिकों के बीच विचारों एवं विशेषज्ञता के पर-निषेचन
को उत्प्रेरित करना।
-
जैवचिकित्सा और जैवप्रौद्योगिकी उत्पादों के विकास,
विनिर्माण तथा उपयोग के लिए संबद्ध ज्ञान के क्षेत्र में
आधारभूत योग्यता का उन्नयन करना।
-
परस्पर सहयोग तथा अन्य अकादमिक विनिमयों के जरिए विदेशी
स्थलों से प्रतिभा तथा विशेषज्ञता आकर्षित करने के लिए
उपयुक्त परिस्थितियां सृजित करना।
प्रस्ताव जमा करने का विवरण तथा अन्य संबंधित सामग्री
drdo.org/boards/lsrb/fplsrb.htm
पर उपलब्ध है।
अधिक जानकारी के लिए, कृपया संपर्क करें :
सचिव,
जैव विज्ञान अनुसंधान बोर्ड
जैव विज्ञान निदेशालय
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन
चाणक्य
भवन,
नई
दिल्ली - 110021
टेलीफोन
: 011-26889625,
फैक्स : 011-26889905,
26881095
ईमेल :
dls_drdo@hotmail.com
वेब :
www.drdo.org |
|
नौसैनिक अनुसंधान बोर्ड (एनआरबी) |
|
एनआरबी का गठन सामुद्रिक प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में
मौलिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करने और नौसैनिक पर्यावरण
से संबंधित ज्ञान-आधार को सुदृढ़ एवं गहरा बनाने के लिए
अगस्त 1996 में किया गया था। बोर्ड ने देश में मौलिक
अनुसंधान, अभिकल्प एवं विकास को प्रोत्साहित करने के लिए
शोध प्रतिभाओं को पोषित करने तथा आईआईटी, विश्वविद्यालयों,
उच्चतर प्रौद्योगिकी संस्थानों, इंजीनियरिंग संस्थानों और
उद्योगों सहित अन्य शोध केंद्रों में शोध सुविधाएं सृजित
करने के लिए एक सहायता अनुदान योजना संस्थापित की है।
एनआरबी के उद्देश्य इस प्रकार हैं :
-
उभरती हुई प्रतिभाओं को, विशेष रूप से अकादमिक संस्थानों
में, समर्थन तथा सहायता प्रदान कर हमारी भावी नौसेना के
लिए व्यापक रूप से प्रासंगिक उपयुक्त वैज्ञानिक
अनुशासनों में मौलिक अनुसंधान को प्रोत्साहित तथा
वित्तपोषित करना।
-
नौसेना के लिए प्रयुक्त होने की संभावना वाले ज्ञान-आधार
को सृजित तथा विकसित करना।
बोर्ड नवोन्मेषी अनुसंधान कार्य के जरिए अनुप्रयोज्य
ज्ञान-आधार के निर्माण/उन्नयन पर ध्यान केंद्रित करता है
जिसके आधार पर सैनिक उद्देश्यों के लिए समुद्र के उपयोग के
साथ ही शांतिपूर्ण तकनीकों/संबंधित उपकरणों, समुद्र की सतह
के नीचे संचार, रेंजिंग एवं इमेजिंग प्रणालियों, सामुद्रिक
जैव क्रियात्मक संसाधनों, पर्यावरणीय खतरों एवं संचालनों,
अभिकल्प उपकरणों सहित संवर्गीय प्रौद्योगिकीयों के विकास
तथा नौसेना में मानवीय कारकों की समझदारी के क्षेत्र में
मदद मिल सकती है।
बोर्ड ऐसे मौलिक अनुसंधान को समर्थन देता है जो नौसेना के
लिए संभावित रूप से उपयोगी नया ज्ञान उत्पन्न करेगा और
युवा मस्तिष्कों को यह ज्ञान उत्पन्न करने और नौसैनिक
उद्देश्यों के लिए उसका उपयोग करने में प्रशिक्षित करता
है। बोर्ड विभिन्न अनुशासनों जैसे स्टेल्थ पदार्थों,
जलगतिकी (प्रणोदन सहित), सोनार एवं सिगनल आचरण, सामुद्रिक
पर्यावरण और वैज्ञानिक संगणन में विशेषज्ञ पैनलों के
मूल्यांकन और संस्तुतियों के आधार पर शोध कार्यक्रमों के
लिए वित्तपोषण का अनुमोदन करता है।
एनआरबी परियोजनाओं के प्रस्ताव आमंत्रित करता है जो
निर्दिष्ट प्रपत्र के अनुसार आवश्यक सूचनाओं के साथ अपने
संस्थानों के माध्यम से पैनल के प्रमुख अथवा सचिव, एनआरबी
के पास जमा किये जा सकते हैं। प्रपत्र एनआरबी की आधिकारिक
वेबसाइट
(www.nrbdrdo.res.in)
से डाउनलोड किया जा सकता है।
अधिक जानकारी के लिए, कृपया संपर्क करें :
सदस्य सचिव
नौसैनिक अनुसंधान बोर्ड
नौसैनिक अनुसंधान एवं विकास निदेशालय
5वीं मंजिल, चाणक्य भवन
नई
दिल्ली - 110021
टेलीफोन : 011-26889625,
फैक्स : 011-26889905,
ईमेल :
dls_drdo@hotmail.com
वेब :
www.drdo.org |
|
वैमानिकी अनुसंधान एवं विकास बोर्ड (एआरडीबी) |
|
वैमानिकी अनुसंधान एवं विकास बोर्ड (एआरडीबी) की स्थापना
भारत सरकार ने अकादमिक संस्थानों और राष्ट्रीय विज्ञान
प्रयोगशालाओं में वैमानिकी प्रणालियों के लिए संभावित
अनुप्रयोगों वाले भविष्योन्मुखी, वैज्ञानिक एवं
प्रौद्योगिकीय क्षेत्रों में अनुसंधान का समन्वय करने,
वित्त प्रदान करने तथा संवेदनशील बनाने के लिए की थी। इस
उद्देश्य से, प्रति वर्ष रु. 5 करोड़ का सहायता अनुदान
चिन्हित किया गया है। परियोजना गतिविधियों के अतिरिक्त
बोर्ड चुनिंदा क्षेत्रों जैसे संगणकीय तरल गतिकी, प्रणाली
अभिकल्प एवं अभियांत्रिकी तथा सम्मिश्र संरचना
प्रौद्योगिकी में उत्कृष्टता केंद्रों को प्रोत्साहित करता
है; कुछ अन्य केंद्र भी विचाराधीन हैं। एआरडीबी के
वित्तपोषण के माध्यम से विकसित बौद्धिक संपदा अनुदान
प्राप्तकर्ता संस्थान के साथ साझा की जाती है। बोर्ड
संगोष्ठियों, भारत एवं विदेश में शोधपत्रों की प्रस्तुति,
पुस्तकों के लेखन और स्कूली बच्चों में वैज्ञानिक
अभिवृत्ति के विकास को भी प्रोत्साहित करता है।
अधिक
जानकारी के लिए, कृपया संपर्क करें :
सचिव
वैमानिकी अनुसंधान एवं विकास बोर्ड
कमरा सं. 332,
'बी' विंग, सेना भवन
नई दिल्ली - 110011
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आयुध अनुसंधान बोर्ड (एआरएमआरईबी) |
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आयुध अनुसंधान बोर्ड (एआरएमआरईबी) का गठन 1997 में आयुध
अनुशासन के लिए उपयोगी वैज्ञानिक क्षेत्रों में नवोन्मेषी
अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए किया गया था। बोर्ड
का गठन भावी चुनौतियों का सामना करने के लिए आयुधों के
क्षेत्र में बौद्धिक, भौतिक अवरचना और वैज्ञानिक समझदारी
को उन्नत करने के उद्देश्य से किया गया था। आयुध एक
संश्लिष्ट बहु-अनुशासनिक क्षेत्र होने के कारण इसमें
प्राक्षेपिकी एवं वायुगतिकी, पदार्थ एवं धातुविज्ञान,
यांत्रिक एवं इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग,
ऑप्टो-इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कंप्यूटर तकनीक, विस्फोटक एवं
अग्निक्रीड़ाविज्ञान, मॉडलिंग, सिमुलेशन तथा प्रणाली
विश्लेषण आदि शामिल होते हैं। बोर्ड के अंतर्गत तीन
अनुसंधान पैनल कार्यरत हैं जिनके दायरे में आयुध अनुशासन
का संपूर्ण वर्णक्रम आ जाता है। |
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उद्देश्य : |
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एआरएमआरईबी के निम्नलिखित उद्देश्य हैं :-
-
देश में आयुध अनुशासन की ज्ञान आधारित वृद्धि को पोषित
करना, ज्ञान, तकनीकी जानकारी, अनुभव, सुविधाओं और अवरचना
के राष्ट्रीय संसाधनों को मजबूत तथा एकीकृत करना।
-
आयुध प्रौद्योगिकी में योगदान देने वाले वैज्ञानिक एवं
तकनीकी क्षेत्रों में रक्षा एवं गैर रक्षा विशेषज्ञों के
बीच विचारों और अनुभवों के अपेक्षित पर-निषेतन को
उत्प्रेरित करना।
-
अकादमिक शिक्षा संस्थानों में आयुध अनुशासन के विशिष्ट
क्षेत्रों में शोध कार्यों का आरंभ एवं समन्वयन करना।
-
शोध सहभागिताओं और अन्य अकादमिक विनिमयों के माध्यम से
प्रतिभाओं और अनुभव को आकर्षित करने के लिए उचित
परिस्थितियों का सृजन करना।
-
आयुधों के क्षेत्र में राष्ट्रीय आवश्यकताओं एवं
प्राथमिकताओं की दिशा में साहचर्य का दृष्टिकोण अपनाते
हुए भी कुंजीभूत क्षेत्रों में योग्यता विकसित करने की
दृष्टि से वैश्विक प्रगतियों को ध्यान में रखना।
-
प्रतिस्पर्धी आयुध भंडारों के विकास के लिए आवश्यक
महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता निर्मित
करने में मदद करना और आयुध अनुशासन को वैश्विक परिदृश्य
में अग्रिम पंक्ति में रखना।
-
निकट और दूरवर्ती भविष्य, दोनों ही के लिए संग्राम गुणक
हेतु उपयोगी प्रौद्योगिकीय नवोन्मेषों का आधार तैयार
करना।
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कर्तव्यों का घोषणापत्र
: |
एआरएमआरईबी के कर्तव्यों का घोषणापत्र निम्नलिखित है :-
-
आयुध अनुशासन पर लागू होने वाले मौलिक अनुसंधान का
समर्थन करना।
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अकादमिक जगत के साथ डीआरडीओ के संबंध के प्रबंधन के लिए
सिद्धांतों और व्यवहारों को नियत करना।
-
विशेषज्ञ मूल्यांकन द्वारा, एआरएमआरईबी में प्रस्तुत शोध
प्रस्तावों पर विचार करना और उन्हें स्वीकृत करना।
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एआरएमआरईबी के शोध पैनलों के लिए फंडिंग का प्रतिमान और
फंडिंग पद्धति नियत करना।
-
एआरएमआरईबी प्रणाली हार्डवेयर के विकास की फंडिंग से अलग
रहेगा।
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सहायक अनुदान योजना |
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अकादमिक संस्थानों के शोधरत प्रतिभाओं को सन्नद्ध और पोषित
करने के लिए एआरएमआरईबी ने एक "सहायक अनुदान" योजना
स्थापित की है। इस योजना के अंतर्गत शोध
संस्थाओं/विश्वविद्यालयों/विभागों/प्रयोगशालाओं/उद्योगों
में आधारभूत विज्ञानों और इंजीनियरिंग में शोध करने,
बुनियादी सहूलियतें/ढांचा खड़ा करने,
सेमिनार/परिचर्चा/कार्यशालाएं आदि संगठित करने के लिए
अनुदान प्रदान किए जाते हैं।
अधिक जानकारी के लिए, कृपया संपर्क करें :
निदेशक
एआरएमआरईबी
कमरा सं. 601
6वीं मंजिल, चाणक्य भवन
चाणक्य पुरी
नई दिल्ली - 110021
फोन नं. : 011-26889779,
फैक्स : 011-27889657,
ईमेल :
harihar@drdohq.res.in |
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बाह्य अनुसंधान /बौद्धिक सम्पदा अधिकार (ईआर/आईपीआर) |
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डीआरडीओ विविध अकादमिक संस्थानों और अपने सीमा-क्षेत्र के
बाहर
अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशालाओं में डीआरडीओ की सहायता
अनुदान योजना के अंतर्गत बुनियादी विज्ञान/प्रयुक्त
विज्ञान के क्षेत्र में नई शोध परियोजनाओं को प्रायोजित कर
रहा है। ईआर/आईपीआर की संचालक समिति विविध अकादमिक
संस्थानों की अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशालाओं और उद्योगों
से बताए गए प्रारूप में परियोजना प्रस्ताव आमंत्रित करती
है। प्रस्ताव की वैज्ञानिक एवं तकनीकी खूबियों पर आधारित
समीक्षा के लिए प्रस्ताव को संबंधित डीआरडीओ
प्रयोगशालाओं/अकादमिक संस्थानों/अन्य अनुसंधान एवं विकास
प्रयोगशालाओं में भेजा जाता है। इसके बाद यदि समीक्षक को
परियोजना में किसी तरह के स्पष्टीकरण/संशोधन की आवश्यकता
जान पड़ी तो समीक्षक के नाम या पते का खुलासा किए बगैर
समीक्षकों की टिप्पणियां परियोजना के जांचकर्त्ताओं को
अग्रसारित कर दी जाएंगी। समीक्षकों द्वारा की गई अनुकूल
टिप्पणियों के आधार पर कार्यवृत्त तैयार किए जाएंगे और इसे
अनुमोदन प्रदान करने/मंजूरी देने के लिए मामले को संबंधित
अधिकार प्राप्त प्राधिकारी के सामने प्रस्तुत कर दिया
जाएगा। शोध कार्य की प्रगति की समीक्षा डीआरडीओ द्वारा
नियमित अंतराल पर की जाती है और परियोजना के जांचकर्त्ता
द्वारा संचालक समिति के सामने परियोजना समीक्षा परिषद
द्वारा (पीआरसी) तैयार कार्यवृत्त के साथ प्रगति की
रिपोर्ट प्रस्तुत की जाती है। मंजूरी प्राप्त अनुदान से
अर्जित पूंजीगत स्वभाव की परिसंपत्तियां डीआरडीओ की
संपत्ति होंगी।
परियोजना के जांचकर्त्ता द्वारा परियोजना की समाप्ति पर
बाह्य लेखा-परीक्षक प्राधिकारी/वैधानिक लेखा-परीक्षक
द्वारा अंकेक्षित खाते,उपयोग प्रमाणपत्र और समापन रिर्पोट
को दाखिल किया जाता है। इन परियोजनाओं से सृजित होने वाली
बौद्धिक सम्पदा गृह संस्थान से सन्नद्ध होती है, डीआरडीओ
प्रयोगशालाओं द्वारा आयोजित सीएआर परियोजनाओं की तरह नहीं
जहां यह मूल प्रयोगशाला के साथ सन्नद्ध होती है।
ईआर/आईपीआर की संचालक समिति विविध अकादमिक
संस्थानों/अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशालाओं को
डीआरडीओ/सुरक्षा के हित में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के
क्षेत्र में सम्मेलन/परिसंवाद/कार्यशाला/सेमिनार संगठित
करने के लिए सहायक अनुदान प्रदान करती है। परियोजना के
जांचकर्त्ता से परियोजना की समाप्ति पर प्राप्त होने वाली
तकनीकी रिपोर्टों को उनके अध्ययन, टिप्पणी और प्रयोग के
लिए संबंधित डीआरडीओ प्रयोगशालाओं में परिचालित किया जाता
है। |
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उद्योगों के साथ
साझीदारी |
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डीआरडीओ ने सुरक्षा संबंधी उत्पादन में भारतीय उद्योगों की
भागीदारी को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करने का सचेतन
निर्णय लिया है। उद्योगों के साथ अंतरक्रिया की प्रक्रिया
उत्पाद चक्र के विभिन्न चरणों के दौरान होगी, जैसे ;-
-
विकास
चरण
- एक बार विकसित हो चुकी प्रणाली/उत्पाद के पहचान कर लिए
जाने और गुणात्मक आवश्यकताओं के स्थापित हो जाने पर,
'विकासमान साझीदारों' के रूप में गतिविधि में भागीदारी
करने के लिए उचित औद्योगिक इकाइयों की पहचान की जाती है।
-
एलएसपी
(सीमित श्रृंखला उत्पादन) चरण - संभावित उपयोगकर्त्ताओं
द्वारा एक बार प्रयोगशाला में विकसित प्रोटोटाइप प्रणाली
का सफलतापूर्वक मूल्यांकन कर लेने के बाद, सामान्यत:
संभावित उपयोगकर्त्ताओं द्वारा सीमित स्तर पर श्रृंखला
उत्पादन का आदेश दिया जाता है। गतिविधि के इस चरण के
निष्पादन के लिए औद्योगिक साझीदारों को सहयोजित किया
जाता है।
-
अधिक मात्रा में उत्पादन
- हालांकि परम्परागत रूप से पीएसयू और आयुध कारखाने अधिक
मात्रा में शस्त्र प्रणालियों और उपकरणों के उत्पादन काम
हाथ में लेते रहे हैं। प्राथमिक तौर पर, उप-प्रणाली के
उत्पादन के काम के एक महत्वपूर्ण हिस्से को उनके द्वारा
नोडल डीआरडीओ प्रयोगशाला से लेकर नागरिक क्षेत्र की निजी
कंपनियों तक से परामर्श के बाद तैयार किया जाता है।
सुरक्षा उत्पादन से लेकर निजी क्षेत्रों के उद्योगों तक
के खुलते जाने के साथ, उनकी भागीदारी लगातार बढ़ती जा
रही है।
-
व्युत्पन्न उत्पाद, मार्केटिंग
- रक्षा प्रौद्योगिकी से व्युत्पन्न नागरिक उत्पादों की
आवश्यक पैकेजिंग/संशोधन करके उनका लाभ उठाने के लिए निजी
उद्योगों का आह्वान किया गया है। कभी-कभी यह आवश्यक होता
है कि उद्योग द्वारा एक निश्चित समय तक उपकरण की देखरेख
अपनी उप-प्रणालियों पर की जाए। उचित मंजूरी के बाद
उद्योग द्वारा इन उत्पादों के लिए भारत/विदेशों में
संभावित बाजार तलाशने की भी संभावना है।
डीआरडीओ निजी उद्योगों को उनकी समस्त विशिष्टताओं के साथ
भागीदारी करने के लिए सक्रिय रूप से प्रेरित करता है।
नियमित समयान्तरालों पर परस्पर प्रक्रियाएं संगठित की जाती
हैं, यह सिर्फ इच्छुक औद्योगिक इकाइयों में ही नहीं बल्कि
सीआईआई, फिक्की, एसोचैम जैसे संगठनों के साथ भी की जाती
है। डीआरडीओ ने उद्योग के अनुभवी जनों का मूल्यांकन करने
एवं सुरक्षा अनुसंधान एवं विकास में उन्हें अवसर प्रदान
करने के लिए कुछ डीआरडीओ-इंडस्ट्री संगठित की हैं। भारतीय
उद्योग द्वारा इन पहलकदमियों की बहुत सराहना की गई है। |
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प्रदर्शनियां एवं
एक्सपोजीशन |
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सुरक्षा अनुसंधान एवं विकास की अपनी
उपलब्धियों का प्रदर्शन करने और हमारी कुशलताओं एवं
क्षमताओं के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए डीआरडीओ
राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय
एक्सपोजीशनों/प्रदर्शनियों
में सक्रिय भागीदारी करता है। ऐसे कुछ प्रमुख समारोह
जिनमें डीआरडीओ नियमित तौर पर भागीदारी करता रहा है, वे
हैं :-
(क)
डेफएक्स्पो -दो
वर्ष में एक बार
(ख)
एअरो
इंडिया -दो
वर्ष में एक बार
(ग)
राष्ट्रीय विज्ञान
कांग्रेस -प्रति वर्ष
(घ)
भारतीय सैन्यदल के एक भाग के तौर पर
अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियां-
एशियन एअरोस्पेस इन सिंगापुर
-दो
वर्ष में एक बार
(ङ)
निर्देशानुसार भारत/विदेश में
इसी तरह के अन्य कोई भी
आयोजन -आवश्यकतानुसार
'विज्ञान रेल' में डीआरडीओ की भागीदारी को शानदार सफलता
मिली थी। सचल प्रदर्शनी ने देश के हर एक कोने से आए
दर्शनार्थियों से जबर्दस्त प्रशंसा प्राप्त की। विज्ञान
एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने ट्रेन की एक दूसरी दौड़
--सचल विज्ञान प्रदर्शनी--आयोजित कराई और इस बार इसका नाम
विज्ञान मेल रखा गया।
अधिक जानकारी के लिए, कृपया संपर्क करें :-
सी-टेक (सेंटर फॉर टेक्नोलॉजी एक्सटेंशन एंड कोऑपरेशन)
कमरा नं. 112-ए
'बी' विंग, सेना भवन
नई दिल्ली - 110011
फोन नं. : 011-23013209, 011-23015291,
फैक्स : 011-23793008 |
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